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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में क्या होने वाला है? यह सर्वे काफी चौंकाने वाला है

चुनाव पर सबकी नजर है। कौन क्या कहता है उसका क्या असर होने वाला है? हर कोई अपने नजरिये से देख रहा है। लेकिन आपको सही और सटीक विश्लेषण तक कौन ले जा रहा है यह आपको तय करना है। यूपी चुनाव पर बेहद अहम सर्वे और उसके परिणाम पर बात करें उससे पहले बस इतना जान लीजिये कि 2022 में आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है औऱ इसका अर्थ शायद यह हो कि जैसा कि कहा जा रहा है कि 2022 में यूपी से योगी सरकार जायेगी फिर 2024 में केंद्र की मोदी सरकार जायेगी। जी हां कुछ ऐसे ही होने वाला है और एक चौंकाने वाला सर्वे आया है।

एबीपी सी वोटर सर्वे की ओर से विधानसभा चुनावों में किस पार्टी की किस राज्य में सरकार बनने वाली है? यह बताया गया है। और यह सर्वे सिर्फ यूपी में योगी सरकार के लिए धक्का देने वाला नहीं है बल्कि अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भी बीजेपी को सतर्क करने के लिए है। हम इस सर्वे के बाद फोरम4 का एक खास सर्वे भी दिखाएंगे। अभी हम यूपी की बात करते हैं और सीधे मुद्दे पर आते हैं।

यूपी विधानसभा की 403 सीटों के लिए एबीपी सी वोटर सर्वे  लगातार सर्वे कर रहा है। सर्वे का सैंपल साइज 1,07,193 था और इनमें पांचों राज्यों के लोग शामिल थे। सितंबर, अक्टूबर, नवंबर माह में अब तक 3 बार सर्वे आ चुका है। सितंबर में इसने बीजेपी को 259-267 सीटें दीं। अक्टूबर में 241-249 सीटें और नवंबर में 213-221 सीटें दीं। यही वो नवंबर का सर्वे है। जिसमें बीजेपी का भारी नुकसान होते हुए आप देख सकते हैं। इसने सीधे-सीधे 259-से गिराकर बीजेपी को 213 तक ला दिया है। यानी 46 सीटों की कमी अगर केवल तीन माह में आप देख रहे हैं। यहां ध्यान देना जरूरी है कि 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 325 सीटें मिली थीं। तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अबकी बार बीजेपी सरकार का ख्वाब देखने वालों के लिए कितना बड़ा झटका लगने वाला है। अगर दिसंबर-जनवरी में इसी तरह से सीटें कम हुईं जोकि ये सर्वे दिखाएं या न दिखाएं अभी हमारे ग्राउंड रिपोर्टिंग में आपको दिख भी रहा होगा कि योगी सरकार से लोग कितने नाखुश हैं। अगर ऐसा हुआ तो देश के गृहमंत्री अमित शाह जो कि कह रहे हैं कि 2024 में मोदी को पीएम बनाने के लिए 2022 में योगी को जिताना पड़ेगा। यह सबका सब धरा रह जाएंगा।

इसी सर्वे में लेकिन दूसरी पार्टियों को भी देखिये कि अगर बीजेपी का ग्राफ तेजी से घटता दिख रहा है तो समाजवादी पार्टी के मुख्य चेहरे अखिलेश यादव का यूपी में मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस समाजवादी पार्टी को एबीपी सी वोटर सर्वे ने सितंबर में 109 सीटें दी थी। उसे ही इस नवंबर के सर्वे में 160 सीटें देते हुए दिख रही है। यानी कुल 51 सीटें पिछले 3 माह में बढ़ते हुए देखी जा रही हैं। बीजेपी और समाजवादी पार्टी के अलावा दूसरी पार्टियां इस सर्वे में काफी पीछे हैं बीएसपी को इस सर्वे में 12 सीटों से 20 सीटों के बीच दी जा रही हैं।

इस प्रकार से अगर केवल इस सर्वे को देख लें हालांकि गोदी मीडिया के सर्वे के अनुमान चाहे वे कितना भी कोशिश कर लें। बीजेपी के कमजोर होने के बाद भी ये सर्वे हमेशा बीजेपी को टक्कर में रखते ही हैं। आप दिल्ली विधानसभा चुनाव, तमाम उपचुनावों और बंगाल के विधानसभा चुनावों को ही देख लीजिये कि ये सर्वे किस तरह से धराशाई हो गये। फिर भी आप इनके आंकड़ों पर नजर रखकर इतना समझ सकते हैं कि कौन 2022 में यूपी में सरकार बनाने वाला है।

अब एबीपी सी वोटर सर्वे  का यह आंकड़ा भी देखिये वोट पर्सेंटेज में बीजेपी को 41 पर्सेंटेंज जो कि 2017 से थोड़ा सा कम है। और एसपी को 31 पर्सेंटेज वोट मिल रहे हैं। इसके अलावा बसपा को 15 पर्सेंटेज वोट मिलने का अनुमान है। वहीं कांग्रेस को 9 पर्सेंट वोट मिलता दिख रहा है। यहां सपा को फायदा होता दिख रहा है, क्योंकि अखिलेश यादव की पार्टी को पिछले चुनाव में महज 23.6 फीसदी वोट ही मिले थे। यानी कि पिछले चुनाव से सपा के वोट पर्सेंटेज में 7.4 पर्सेंटेज की बढ़ोतरी हुई है।

एबीपी सी वोटर सर्वे  के आंकड़े के मुताबिक योगी आदित्यनाथ यूपी में पसंदीदा मुख्यमंत्री के तौर पर 40-41 फीसद लोगों के अनुसार नं 1 पर बने हैं। ज्यादा अंतर नहीं है लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि अखिलेश यादव के परसेंटेज में सितंबर के 27 परसेंट से अब नवंबर माह में 31 फीसद तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है। यह अंतर अखिलेश यादव के पसंदीदा मुख्यमंत्री के तौर पर बताने के लिए काफी है।

सर्वे में बड़े मुद्दे जो यूपी में बताये गए हैं वो है-

कानून व्यवस्था – 30%
राम मंदिर – 14%
किसान आंदोलन – 15%
बेरोजगारी – 17%
सामाजिक सौहार्द – 3%
इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, सड़क, पानी – 3%
महंगाई – 15 %
अन्य – 3 %

तो यहां आपको यह भी जानना जरूरी है कि यूपी में इन मुद्दों के अलावा भी कई मुद्दे हैं जो इन्होंने शामिल नहीं किया है- इसमें आपको पता है कि कोरोना कुप्रबंधन का मुद्दा भी शामिल है। आपने गंगा में तैरती लाशों और लोगों के साथ लॉकडाउन में हुए अत्याचार खासकर एक समुदाय को टारगेट करने का आरोप देखा है। और कानून व्यवस्था के बारे में कहना ही क्या वो चाहे गृह राज्य मंत्री की लखीमपुर में करतूत हो या फिर रेप, बलात्कार हत्या में शामिल बीजेपी नेता। सबके सब इसी योगी सरकार की करतूतों से जुड़े हैं। हाथरस, बदायूं, गोरखपुर, अलीगढ़, कासगंज ऐसे न जाने कितने कांड को आप उंगलियों पर गिन सकते हैं।

ये तो रहे मुद्दे और इन मुद्दों को छिपाने के लिए .यूपी ही नहीं राजधानी दिल्ली तक योगी का महिमामंडन विज्ञापन पर अपरंपार खर्च क्या काफी है। जी नहीं बीजेपी कितना भी लीपापोती कर ले, कितना भी भ्रामक विज्ञापन कर ले लेकिन ये मुद्दे लोगों को भूलने वाले नहीं हैं।

हालांकि इस पर भी सवाल उठना लाजमी है कि इसके बाद भी कुछ खबरें निकलकर सामने आ रही हैं।

यह ख़बर अमर उजाला में छपी है। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी इस पर लिखा है कि ‘भीड़ जुटाने के लिए सरकार के ख़ज़ाने से चालीस लाख खर्च हो रहा है। यह तो एक ऐसी ख़बर आ गई है। न जाने कितनी ऐसी ख़बरें नहीं आ रही हैं। जिस पार्टी को सबसे अधिक चंदा मिलता हो, जिसके पास हज़ारों करोड़ रुपये चंदे के है, वह पार्टी सरकारी पैसे से अपना कार्यक्रम करा रही है।’

अब एक जरूरी बात, ये तो रही सर्वे की बातें वो भी एबीपी सी वोटर सर्वे के आंकड़ों की बातें लेकिन हम भी समय समय पर सर्वे करते हैं जिसमें हकीकत सामने आ ही जाती है। यूपी में हमने जो सर्वे किया है उसे देखिये। यह सर्वे सबसे सटीक तरीके से बता रहा है कि इस सर्वे में 16000 लोगों ने भाग लिया और वे कह रहे हैं कि सपा की सरकार बनने वाली है। इन्हें 57 परसेंट लोगों ने वोट किया है। इससे पहले आप अगर हमारे रिपोर्टस को पहले भी देखते रहे हैं तो आपको पता होगा कि बंगाल चुनाव की हर ग्राउंड रिपोर्ट और उसका सर्वें हमने जो दिखाया वही सत्य निकला। तो हमारे साथ अभी यूपी के ग्राउंड रिपोर्ट को भी देखते रहिये। करीब यूपी के 20 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों की 50 ग्राउंड रिपोर्ट अब तक कर चुके हैं। इसमें आपको सच्चाई पता चल ही रही होगी कि यूपी के महासंग्राम में इस बार क्या होने वाला है?  

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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प्रभात
लेखक FORUM4 के संपादक हैं।

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