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दिल्ली में परिवहन व्यवस्था बेहतर करने की हो रही है मांग

कोविड लॉकडाउन खत्म होने के बाद परिवहन व्यवस्था धीरे-धीरे ही सही पर वापस उसी रफ्तार पर जाते हुए दिखने लगी है। कोविड ने हमें पर्यावरण के संबंध में आत्मनिरीक्षण और परिवहन प्रणालियों के बारे में सोचने पर विवश किया है। वैश्विक स्तर पर विभिन्न शहरों ने सार्वजनिक परिवहन की दिशा में अनेक सकारात्मक प्रयास शुरू किए हैं जैसे पैदल यात्री पथ और साइकिल लेन की सुविधाओं की शुरूआत। भारत भी वापस पुराने ढर्रे (जाम की समस्या और वायु प्रदूषण) पर जाने का खतरा मोल नहीं ले सकता। हाल ही में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर करने की मांग के साथ पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस इंडिया ने न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के सामुदायिक केंद्र में कार रैंप-वॉक का आयोजन किया था। ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं शहरवासियों के साथ उनके सार्वजनिक परिवहन के अनुभवों और चुनौतियों पर चर्चा की थी।

पर्यावरण कार्यकर्ता कारज़िल्ला रैंप-वॉक के माध्यम से एक बेहतर परिवहन प्रणाली की मांग कर रहे थे। एक ऐसी व्यवस्था जहां पैदल यात्री सुरक्षित हो। साइकिल एवं अन्य उत्सर्जन-मुक्त परिवहन को प्रोत्साहित किया जाए। इससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलेगी। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के टी.एच. चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने अपने एक शोध में दावा किया कि पीएम2.5 कोविड-19 मृत्यु दर में वृद्धि का एक कारण बन सकता है। वायु प्रदूषण के संपर्क में आने लोगों वाले में सांस संबंधी अनेक बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है।

नागरिकों और सरकार को सभी के लिए स्वच्छ, सस्ती, सुरक्षित और बेहतर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और उसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। बेहतर नीतियों और बुनियादी ढांचे को विकसित करने की आवश्यकता है जिसमें बसों, फीडरों, तिपहिया वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके अलावा, कम उत्सर्जन वाले क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाए जहां प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश करने से रोका जा सके।

सरकार को तात्कालीक कुछ ठोस कदम उठान की जरूरत है। मेरे ख्याल में सबसे पहले सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के विकेंद्रीकृत मॉडल को बढ़ावा दें। एक विश्लेषण द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि 2022 तक एक अरब से अधिक नौकरियाँ अक्षय क्षेत्र द्वारा उपलब्ध कराई जा सकती हैं यदि भारत 160GW के अपने महत्वाकांक्षी नवीकरणीय लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। सरकार को रूफटॉप सौर और विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के अन्य रूपों का समर्थन करने की आवश्यकता है जो कोयला आधारित बिजली की मांग को कम करते हैं। हमारे ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र को जीवाश्म ईंधन से नवीकरण की ओर ले जाने से समय से पहले होने वाली मौतों और स्वास्थ्य लागत में भारी बचत करने में मदद मिलेगी।

दूसरा सबसे महत्वपूर्ण है कि पारिस्थितिकी के साथ रोज़गार सृजन के अवसर पैदा किए जाएं। रोज़गार और कार्बन उत्सर्जन के बीच शाश्वत विरोधाभास का समाधान किया जाए। हमारे पास नए हरे और टिकाऊ मॉडल के साथ समझदार आर्थिक विकास चक्र हो सकते हैं, जो रोज़गार पैदा करते हैं और उत्सर्जन तटस्थ होते हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र का इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तन इस संक्रमण में रोज़गार का एक महत्वपूर्ण उत्पादक हो सकता है क्योंकि यह सेक्टर की नौकरियों को प्रशिक्षण और पुनः-परिवर्तन की प्रक्रिया के माध्यम को बनाए रखने की अनुमति देता है। इसी तरह, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अरबों नौकरियाँ पैदा की जा सकती हैं।

तीसरा कदम जो उठाना चाहिए वह ये कि सरकार सार्वजनिक परिवहन में लोगों का विश्वास पैदा करे। सार्वजनिक परिवहन को एक बड़ी क्षमता की चुनौती का सामना करना पड़ेगा क्योंकि सख्त सामाजिक दूरी बनाए रखने का मतलब होगा कि इनका संचालन प्रति यात्रा के लिए काफी कम क्षमता के साथ करना होगा। यही कारण है कि सुरक्षा के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करना और सफाई व्यवस्था जैसे स्वच्छता उपायों को लागू करना; ड्राइवरों और कर्मचारियों को पीपीई जारी करना; यात्रियों के लिए चेहरा ढकना अनिवार्य करना; और प्रति सवारी यात्रियों की संख्या को सीमित करने के लिए यात्राओं को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

हमें यह समझने की आवश्यकता है कि वायु प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आपातकाल की स्थिती है। बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग जहरीली हवा की चपेट में आते हैं। जहरीली हवा अजन्मे शिशुओं पर प्रभाव डाल रही है। साथ ही वायु प्रदूषण सांस संबंधी बीमारियों और गर्भवती महिलाओं के गर्भधारण को प्रभावित कर रही है।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

About the Author

अस्तित्व
अस्तित्व छात्र होने के साथ-साथ ग्रीनपीस वॉलैन्टियर भी हैं।

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