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डीयू में एडहॉकिज्म खत्म होने पर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक शुरू हुई जंग

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देश के नामी संस्थानों में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में एडहॉक टीचर्स के अपॉइंटमेंट लेटर और सैलरी रोकने का मुद्दा इस समय गरमाया है।

बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रिंसिपल संगठन (Delhi University principal Association) ने पिछले महीने सभी एडहॉक टीचर्स के अपॉइंटमेंट लेटर और सैलरी रोकने का फैसला लिया है। वहीं, इस फैसले की डीयू शिक्षक संघ समेत अन्य टीचर्स ग्रुप ने निंदा की है। इसी के साथ इसी विश्वविद्यालय के नियमों को उल्लंघन बताया गया है।

गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से 28 अगस्त को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) के नियमों का हवाला देते हुए कहा था कि एडहॉक टीचर्स के बजाय गेस्ट टीचर रखे जाएं। यूजीसी के इसी नियमों का हवाला देते हुए डीयू के सभी कॉलेजों ने प्रिंसिपल्स ने सैलरी रोकने का आदेश जारी किया था। दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार (कॉलेजेज) ने 28 अगस्त को सभी कॉलेजों के प्राचार्यों और संस्थाओं के निर्देशकों को पत्र लिखकर कहा है कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए जब तक की सीटें पूरी न हों स्थायी नियुक्तियां की जाएं। अगर 2019-2020 में अगर जरूरत पड़े तो नई रिक्तियों की जगह अतिथि विद्वानों की नियुक्तियां ही हों।

ज्वाइंट फोरम फॉर् अकैडमिक्स एंड सोशल जस्टिस के बैनर तले शिक्षकों ने इसे बहुजनों के खिलाफ बहुत बड़ा हमला बताते हुए युद्ध छेड़ दिया है। इस को देखते हुए तमाम विवि के छात्रों व शिक्षकों ने 1 दिसंबर को बैठक कर तय किया है कि 3 दिसंबर को 4.30 बजे शाम को कला संकाय में कैंडल मार्च इसके प्रतिरोध में निकाला जाएगा। साथ ही 4 दिसंबर को 28 अगस्त के तुगलकी फरमान को वापिस लेने के लिए फूटा का घेराव किया जाएगा।

शिक्षकों की मांग है कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी 28 अगस्त 2019 का फरमान तत्काल वापिस लिया जाए। ओबीसी सेकेंड ट्रेंच में मिले पदों को स्थायी रोस्टर में शामिल करके स्थाय़ी नियुक्तियां न होने तक इन पदों पर एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। साथ ही उच्च शिक्षा की बर्बादी बंद की जाए।

ट्विटर पर भी कर रहा ट्रेंड

एडहॉकिज्म खत्म करने के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त युद्द छेड़ दिया है। इसके लिए 2 नवंबर को सायं 5 बजे सभी शिक्षकों और छात्रों ने ट्वीट #withdraw28thAugustDUfarman के माध्यम से प्रशासन को एक बार फिर से चेताया है। यही वजह है यह ट्विटर पर देर शाम ट्रेंड भी कर रहा था।

 

डीयू के डीन ने पूछा कौन है परीक्षा  ड्यूटी पर? डीन एग्जामिनेशन ने कॉलेजों को लिखा पत्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन एग्जामिनेशन प्रो. विनय गुप्ता ने कॉलेजों के प्राचार्यों को पत्र लिखकर यह जानकारी (डाटा) मांगी है कि कौन -कौन शिक्षक जिसमें, सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट और इंजविलेटर नवम्बर-दिसम्बर में हो रही सेमेस्टर परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह कदम 5 हजार एडहॉक टीचर्स को दिल्ली विश्वविद्यालय से बाहर करने की गहरी साजिश है। उन्होंने बताया है कि डूटा का प्रस्तावित विश्वविद्यालय को बंद करने की अपील को कमजोर करने की साजिश है, लेकिन शिक्षक समुदाय और एडहॉक शिक्षक इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 5 हजार शिक्षकों में से 50 फीसदी से ऊपर आरक्षित वर्ग के शिक्षक हैं जो पिछले 10 से 15 वर्षों से तदर्थ रूप में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गेस्ट टीचर्स नियुक्त करने के प्रावधान में आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की साजिश है, जिसे हम किसी भी हालत में विश्वविद्यालय प्रशासन के मंसूबे को पूरा नहीं होने देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कल 3दिसम्बर को विश्वविद्यालय परिसर में बहुजनों का कैंडल मार्च निकाला जाएगा।

उन्होंने डीयू प्रशासन को चेतावनी दी है कि तदर्थ शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें वरना यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया जाएगा।

डूसू ने भी विवाद खत्म करने का किया आह्वान

डूटा, डूपा और डीयू वीसी से अपील की कि वे हज़ारों एड-हॉक शिक्षकों की नौकरी संबंधी विवाद समाप्त कर विषय को सुलझाएं।

बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ( डूटा ) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के तदर्थ शिक्षकों की पुनःनियुक्ति को प्रशासन द्वारा अधर में लटकाने के निर्णय की प्रतिक्रिया में अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है, डूसू की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस हड़ताल के आह्वान का निर्णय बहुत ही संवेदनशील समय किया गया है। चूंकि सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, इसलिए इस तरह का गतिरोध छात्रों के लिहाज से बेहद ख़तरनाक है ।

डूसू दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से गहरी नींद से जागने,  इस मामले में हस्तक्षेप करने और कोई रास्ता निकालने की मांग करता है। इस प्रकार के प्रस्तावित बहिष्कार की गंभीर नकारात्मकता के संभावित परिणामों को डीयू से जुड़े सभी हितधारकों के नजरिए से देखा जाना चाहिए और ऐसा कुछ होता है तो इसके लिए पूरी तरह से डीयू के कुलपति जिम्मेदार होंगे। छात्रों को इस प्रकार के निर्णयों तथा निरंतर प्रशासनिक संघर्षों से होने वाली हानि हेतु असहाय दर्शक मात्र के रूप में नहीं छोड़ा जा सकता है। जहां पर अनेक हितधारकों कि सामूहिक हित जुड़े हों  वहां पर इस तरह की एकपक्षीयता से बचा जाना चाहिए ।

डीयू की परीक्षाएं प्रभावित न हों

डूसू ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि परीक्षा समय पर हो और किसी भी स्थिति में परीक्षा प्रभावित न हो। साथ ही एडहॉक शिक्षकों की सेवा को विस्तार दिया जाए और तुरंत वेतन जारी करने की व्यवस्था की जाए। 28 अगस्त को इस संदर्भ में जारी किए गए पत्र को विश्वविद्यालय वापस ले तथा विश्वविद्यालय के कुलपति और डूटा अध्यक्ष अपनी दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक खेल को समाप्त करें।

डूसू ने अपने संयुक्त बयान में कहा: “हम किसी भी स्थिति में सेमेस्टर परीक्षा में देरी या रद्द नहीं होने देंगे । हम इस मुद्दे पर डीयू कि एडहॉक शिक्षकों के साथ हैं , लेकिन डूटा अध्यक्ष की विफलता ने सभी को निराश किया है  ।  ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए जहाँ पर छात्रों का नुकसान हों । वीसी को इसका हल खोजना होगा , नहीं तो प्रशासन को छात्रों का आक्रोश झेलने के लिए तैयार रहना होगा।”

डूसू की बैठक का आयोजन डूसू अध्यक्ष अक्षित दहिया, उपाध्यक्ष प्रदीप तंवर, संयुक्त सचिव शिवांगी खरवाल द्वारा किया गया था तथा डीयू के विभिन्न कॉलेजों के निर्वाचित छात्र संघ पदाधिकारियों ने इस बैठक में भाग लिया ।

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