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आखिर कब तक होती रहेंगी रहस्यमयी मौतें? फातिमा के बाद अब आपका नंबर भी हो सकता है!

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संस्थागत हत्याएं पिछले कुछ सालों में बढ़ती हुई दिख रही हैं। 19 वर्षीय फातिमा लतीफ 9 नवंबर को हॉस्टल के अपने कमरे में फंदे से लटकी हुई पाई गई। केरल की रहने वाली फातिमा ने इसी वर्ष आईआईटी मद्रास में एडमिशन लिया था। वह ह्यूमैनिटी एंड डेवलपमेंट स्टडीज में मास्टर कर रही थीं। फातिमा लतीफ 9 नवंबर की सुबह जब अपने कमरे में फंदे से लटकी हुई पाई गईं,तो आईआईटी में यह खबर फैल गई कि फातिमा ने आत्महत्या कर लिया है। फातिमा पढ़ने में बहुत अच्छी थी, लेकिन उनकी आत्महत्या का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है । एक संदेह बार-बार फातिमा की आत्महत्या की तरफ इशारा कर रहा है जिसकी वजह से हो सकता है वह ऐसा कदम उठा सकती हैं। प्रथम सेमेस्टर के सारे विषय में टॉप करने वाली फातिमा का एक विषय में कम अंक आए थे, लेकिन यह कोई बड़ी वजह नहीं है, जिससे वह आत्महत्या कर सकती थीं। तो ऐसा क्या हुआ? फातिमा के साथ जिसने उसे आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया। फातिमा के पिता एक प्रोफेसर की तरफ इशारा करते हुए प्रधानमंत्री से एक अपील किये है कि वह उनकी बेटी को न्याय दिलाएं। उन्होंने अपील में लिखा है कि फातिमा के मोबाइल फोन में नोट हैं जिसमें एक प्रोफेसर का जिक्र है, जिसमें लिखा है कि प्रोफेसर उनकी मृत्यु का जिम्मेदार है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए फातिमा के पिता प्रोफेसर को ही फातिमा की मृत्यु का जिम्मेदार बताया है वैसे आईआईटी मद्रास में 1 साल में यह पांचवी आत्महत्या है। मद्रास के आईआईटी (IIT) संस्थान में यह पाँचवी आत्महत्या है। इससे पहले भी हैदराबाद का छात्र रोहित वेमुला जातिगत भेदभाव और टिप्पणी के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो गया था । इसी प्रकार का भेदभाव फातिमा लतीफ़ के साथ भी देखा जा सकता है।

पुलिस अधिकारी के अनुसार फातिमा की आत्महत्या का कारण उसका पहली बार अपने परिवार से दूर रहने आईआईटी में रहना जिससे वह काफी परेशान रहती थी। पुलिस के अनुसार दूसरी वजह फातिमा के इंटरनल परीक्षा में एक विषय में नंबर कम होने का कारण हो सकता है। लेकिन, फातिमा का बार -बार अपने परिवार से यह कहना शक पैदा करता है कि उनके एक प्रोफेसर उसको परेशान करते है, उसकी योग्यता के अनुसार उसे नम्बर नहीं देते और नम्बर काट लेते हैं।

डीयू के असिस्टैंट प्रोफेसर डॉ लक्ष्मण यादव की मानें तो भारत के इतिहास में ये पहली दफा नहीं है जब देश में इस तरह की घटनाएं न हुई हैं। इसका इतिहास रहा है जाति के आधार पर भेदभाव करना, बस फ़र्क बदल गया है पहले अंगूठे काटे जाते थे अब नंम्बर।

दलित प्रोफेसर सुकुमार की मानें तो शिक्षा की सरकारी संस्थाओं में बीते कुछ वर्षों में अल्पसंख्यक या पिछड़े समुदाय से आये लोग आत्महत्या कर रहे हैं। यह बेहद गम्भीर मामला है। इनके साथ जाति के नाम पर नफरत और दुर्व्यव्हार किसी को इस कदर मजबूर कर देता है कि छात्र जाति के विष को खुद ही पी के मर जाना आसान समझने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला कुछ समय पहले देखने को मिला जिसकी शिकार हुई पायल तड़वी। जिसको जाति के नाम पर प्रताड़ित कर उसकी हत्या जाति के बाण से करवाई गई। ऐसे बहुत से मामले है जिन्हें देख के लगता है कि जाति इंसानियत को निगल जायेगी।

अगर फातिमा के मामले को देखें तो पुलिस ने इसे आत्महत्या का केस बताते हुए कहा है कि फातिमा ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा जिसे पता चले कि आखिर फातिमा ने आत्महत्या क्यों की। वहीं दूसरी तरफ फातिमा के पिता ने केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन को याचिका देते हुए आग्रह किया है कि तमिलनाडु सरकार जो जांच कर रही है उसमें केरल सरकार दखलअंदाजी करे। फातिमा का फोन जांच कर रही पुलिस के पास है। फातिमा के पिता ने जिस प्रोफेसर की तरफ इशारा किया है उस प्रोफेसर की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। फातिमा जिस ह्यूमैनिटी एंड डेवलपमेंट स्टडीज में पढ़ रही थी उसके हेड अमरकांत का कहना है ,कि पूरा डिपार्टमेंट सदमे में है। किसी को समझ नहीं आ रहा है जो हुआ क्यों हुआ? और कैसे हुआ? प्रोफेसर के साथ जो घटना जोड़ा जा रहा है वह पिछले हफ्ते बांटी गई उत्तर पुस्तिका से जुड़ा है फातिमा ने सारे विषय में टॉप किया था, लेकिन सिर्फ परिवार के लिए आरोपी प्रोफेसर के विषय में वह दूसरे स्थान पर आई थी। मुझे बताया गया है फातिमा को उस विषय में तीन या दो नंबर की जरूरत थी। तो क्या इंटर्नल परीक्षा में दो या तीन नंबर कम आने से फातिमा ने आत्महत्या कर ली? अब फातिमा की आत्महत्या अपने पीछे तमाम सवाल छोड़ गई है, जिसका जवाब अनसुलझी पहेली बनकर रह गई है।

आज कल जो सांस्थानिक हत्याएं हो रही है, उसकी जड़ें बहुत गहरी होती जा रही है। इसका अंत अनिश्चित सा प्रतीत होता है। जिस तरह से सिलसिलेवार घटनाएं देखी जा रही है उससे यही लगता है कि यह रोग बहुत गहरा है जिस तरह से जेएनयू से नजीब गायब हुआ और उसकी मां अब तक ढूंढ़ रही हैं। रोहित और पायल तड़वी की मौत हो जाती है। अब आने वाला समय बताएगा कि फातिमा के बाद किसका नंबर है?

About the Author

काजल सिंह
पत्रकार और लेखिका

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