गांव मेरा मुझे याद आता रहा (छात्र की डायरी)
उन दिनों सुबह कितनी जल्दी हो जाया करती थीं। शाम भी कुछ जल्दी घिर आया करती थीं तब फूलों की महक भीनी हुआ करती थीं और तितलियां रंगीन। इन्द्रधनुष के रंग थोड़े चमकीले, थोड़े गीले…
उन दिनों सुबह कितनी जल्दी हो जाया करती थीं। शाम भी कुछ जल्दी घिर आया करती थीं तब फूलों की महक भीनी हुआ करती थीं और तितलियां रंगीन। इन्द्रधनुष के रंग थोड़े चमकीले, थोड़े गीले…
-पूजा कुमारी “गुरु गोवन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय ।।” – कबीर कबीर का यह दोहा बहुत ही प्रसिद्ध एवं बहुश्रूत है। हम सभी बचपन से ही इसे पढ़ते,…