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क्या जेएनयू में खत्म हो जाएगी ढाबा संस्कृति, आइये जानते हैं इन ढाबों की कहानी

नई दिल्ली। खबर है कि जेएनयू में ढाबों की जगह फूड कोर्ट ले सकते हैं, जेएनयू रजिस्ट्रार डॉ प्रमोद कुमार ने कहा है कि ढाबों की जगह फूड कोर्ट के फैसले पर विचार हो रहा है। हालांकि, छात्र संघ ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया है और इसे कैंपस में निजीकरण को बढ़ावा देने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के ढाबों पर खतरा मंडरा रहा है। जेएनयू प्रशासन अपने परिसर में नए फूड कोर्ट बनाने की तैयारी में है। मंगलवार को हुई एग्जिक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की बैठक में तय किया गया कि साफ और सस्ते खाने की छात्रों की मांगों को देखते हुए परिसर में अलग-अलग जगहों पर फूड कोर्ट खोलने की गुंजाइश तलाशी जाएगी।

एक तरफ जहां जेएनयू के रजिस्ट्रार डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि इससे देश के अलग-अलग हिस्से से आ रहे छात्रों को खाने में कई प्रकार की चीजें उपलब्ध होंगी। छात्रों को बातचीत करने के लिए नई जगहें भी मिलेंगी। वहीं छात्र अब सोशल मीडिया पर भी इसके खिलाफ अभियान छेड़ते नजर आ रहे हैं।

ईसी ने यह भी तय किया है कि परिसर में मौजूद जो कैंटीन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, नई कैंटीन चलाने के लिए नए टेंडर जारी किए जाएंगे।

जेएनयू छात्रसंघ ने कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार पर विश्वविद्यालय की पहचान खत्म करने का आरोप लगाया है। ढाबा पर खाना सस्ता होने के साथ लोगों को रोजगार भी मिलता है। ढाबा जेएनयू की पहचान है। देश और दुनिया के किसी भी मुद्दे पर चर्चा और सुझाव ढाबा से ही तय होते हैं। ढाबा पर बैठकर छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे और मतदाताओं से बात भी होती है। ढाबा संस्कति के चलते दिल्ली के हर कोने से युवा इन्हीं ढाबा में खाना खाने आते हैं। छात्रों में इस चीज को लेकर नाराजगी है कि अगर ये ढाबे नहीं रहे तो जेएनयू अपनी पहचान खो न दे।
जेएनयू फेसबुक पेज पर छात्रों ने पूर्व छात्रों से जेएनयू ढाबा बचाने की अपील की है। सोशल मीडिया पर जेएनयू ढाबा बचाओ अभियान शुरू हो गया है। छात्रों का कहना है कि जेएनयू में आम व पिछड़े इलाकों के छात्र पढने आते हैं। आर्थिक दिक्कत के चलते ही वे स्कॉलरशिप राशि से उच्च शिक्षा का सपना पूरा कर पाते है।

जेएनयू में दाखिला फीस सबसे कम हैं। यहां रहने के लिए सस्ते छात्रावास मौजूद हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग परिवारों के छात्रों के लिए फूडकोर्ट की बजाय ढाबा ही पसंद आते हैं। ढाबा में वे दोस्तों के साथ बैठकर देश-दुनिया पर चर्चा करते हैं। ढाबा बंद होने से जेएनयू की पहचान गुम हो जाएगी।
जेएनयू छात्र संघ इस फैसले के बिल्कुल खिलाफ है। उनका कहना है कि प्रशासन ढाबा कल्चर को खत्म करके कॉर्पोरेट को लाना चाहता है। निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने की कोशिश है। छात्र संघ अध्यक्ष एन साईं बाला का कहना है कि इन मुद्दों पर बात करने के लिए कैंपस डिवेलपमेंट कमिटी की बैठक भी नहीं बुलाई गई।

जेएनयू के ढाबें रखते हैं अपनी अलग पहचान

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर की पहचान गंगा ढाबा से होती है। ढाबा अगर बंद हुआ तो जेएनयू की पहचान ही बदल जाएगी।  चूंकि देश-दुनिया पर चर्चा करने का ठिकाना ऐसे ढाबे ही हैं। सोशल मीडिया पर छात्रों ने पूर्व छात्रों से भी ढाबा बचाने की अपील की है। फूडकोर्ट नहीं ढाबा से जेएनयू की पहचान के लिए सबसे वोट भी मांगे जा रहे हैं। इसके लिए छात्र अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

ये हैं प्रसिद्ध ढाबे, क्या होगा इनका

जेएनयू में प्रसिद्ध ढाबों में कई नाम हैं जिनमें गंगा ढाबा, टैफ्लाज, 24/7 ढाबा, मुगल दरबार हैं।

गंगा ढाबा एक ऐसा ढाबा है जहां पर सिर्फ पांच मिनट बैठकर कोई भी जेएनयू के बौद्धिक छात्रों का अंदाजा लगा सकता है। शाम के छह बजे के बाद यहां छात्र चर्चा करने के लिए समूह के रूप में जुटने लगते हैं। यह ढाबा रात में दो बजे के बाद भी खुला रहता है। यहां 5 रुपये के आलू परांठे मिलते हैं जो काफी प्रसिद्ध है।

नर्मदा हॉस्टल के सामने है

टैफ्लाज ढाबे में तरह-तरह के लजीज खाना कम रुपये में आसानी से उपलब्ध हैं। यहां की पुरानी कुर्सियां, सोफे, लकड़ियों के बने मेज आपको किसी पुराने होटेल की याद दिलाएंगे। यहां भारत के सभी इलाकों के प्रसिद्ध व्यंजन आपको मिल जाएंगे।

24/7 ढाबा रात की रोशनी में आपको किसी मंहगे रेस्त्रां से ज्यादा अच्छा लग सकता है. अच्छी लाइटिंग और चारों तरफ की खूबसूरती के कारण यह ढाबा कुछ ज्यादा ही गुलजार रहता है। यह रात और दिन 24 घंटे खुला हुआ रहता है। यहां आपको खाने के बहुत सारे प्रकार के व्यंजन उपलब्ध हैं।

मुगल दरबार: अगर आप नॉन वेज के शौकीन हैं तो यह जगह आपको काफी अच्छी लगेगी। यहां अफगानी से लेकर मुगलई फूड के ढेरों व्यंजन आपको मिलेंगे। वहीं, वेज वालों के लिए भी यहां कई तरह के लजीज डिश मौजूद हैं।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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