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डीयूः बिना शुद्धिपत्र दिए कॉलेज निकाल रहे हैं स्थायी नियुक्तियों के विज्ञापन

दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने विभागों में खाली पड़े सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति करने संबंधी विज्ञापन निकाले हैं। इसी कड़ी में अब संबद्ध कॉलेजों ने भी स्थायी नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी करने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल कालिंदी कॉलेज व खालसा कॉलेज ने सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के विज्ञापन जारी किए हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस महीने एक दर्जन कॉलेजों के विज्ञापन आ सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने रोस्टर पास करने के बाद कॉलेजों को स्थायी नियुक्तियों के विज्ञापन निकालने के लिए कहा है। यूजीसी भी खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय को लिख चुकी है। इसलिए कॉलेजों ने सहायक प्रोफेसर के पदों को भरने संबंधी विज्ञापन निकाल रहे हैं। स्थायी पदों के विज्ञापन आने से एडहॉक टीचर्स में जहां एक तरफ खुशी का माहौल है वहीं दूसरी तरफ शिक्षक संगठन इसे चुनावी राजनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं ।

दिल्ली विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ने डीयू के कुलपति प्रो. योगेश कुमार त्यागी को पत्र लिखकर मांग की है कि विभागों और कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के लिए जो विज्ञापन निकाले जा रहे हैं, इन विज्ञापनों से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉलेजों को पहले निकाले जा चुके पदों के संदर्भ में शुद्धिपत्र (कोरिजेंडम) देना चाहिए था क्योंकि उन पदों को भरने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। साथ ही जिन उम्मीदवारों ने इन पदों को भरने के लिए पहले आवेदन शुल्क दिया है उनसे किसी प्रकार का शुल्क ना लिया जाये। साथ ही उन्होंने इन पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की है।

उन्होंने बताया है कि विश्वविद्यालय की ओर से इन पदों को भरने के लिए तथा 3000 शिक्षकों की पदोन्नति के लिए चयन समिति बन चुकी है।

प्रो. सुमन ने बताया है कि डीयू में फरवरी 2017 में विभिन्न विभागों में 830 पदों के विज्ञापन निकाले गए थे।

इन पदों में सहायक प्रोफेसर (सामान्य-187, एससी-55, एसटी-29, ओबीसी-100, पीडब्ल्यूडी-07) के कुल 378 पद हैं। इसी तरह से एसोसिएट प्रोफेसर (सामान्य-293, एससी-55, एसटी-33, पीडब्ल्यूडी-18) के कुल 399 पद हैं। ठीक इसी प्रकार प्रोफेसर (सामान्य-111, एससी-25, एसटी-10, पीडब्लूडी-07) के कुल 153 पद बनते हैं।

उन्होंने बताया है कि इसी तरह से डीयू से संबद्ध 45 कॉलेजों ने अपने यहां स्थायी पदों के विज्ञापन निकाले। इन पदों में सामान्य के 992, एससी के 296, एसटी के 154, ओबीसी के 498, पीडब्ल्यूडी के 75 के पदों पर नियुक्ति के विज्ञापन निकाले गए थे। इन विज्ञापनों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को 4 लाख 11 हजार आवेदन प्राप्त हुए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने विधि संकाय, प्रबंधन विभाग और एजुकेशन डिपार्टमेंट में लगभग 150 शिक्षकों की नियुक्ति करने के बाद इन विभागों के बाद कॉलेज स्तर पर साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें दौलतराम कॉलेज के एक विभाग में साक्षात्कार हुए। इसके बाद से ना तो किसी कॉलेज और न ही विभाग में साक्षात्कार हुए।

दो कॉलेजों ने स्थायी नियुक्तियों के निकाले विज्ञापन

प्रो. सुमन ने बताया है कि हाल ही में सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति करने के लिए कालिंदी कॉलेज और खालसा कॉलेज ने विज्ञापन निकाले है। उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि इन पदों को निकाले जाने से पहले कॉलेजों को शुद्धिपत्र (कोरिजेंडम) देना चाहिए था या विज्ञापन में ही “यह लिखा जाना चाहिए था कि जिन उम्मीदवारों ने उक्त पदों के लिए पहले आवेदन किया था वे फिर से आवेदन न करें या उनसे किसी तरह का आवेदन शुल्क नहीं लिया जायेगा।” इस तरह का निर्देश कॉलेज ने जारी नहीं किया जबकि इससे पहले भी दो बार विभिन्न कॉलेजों में ये युवा बेरोजगार उम्मीदवार आवेदन कर चुके है।

एकेडेमिक काउंसिल में उठाई थी मांग

प्रो. सुमन कहना है कि एकेडेमिक काउंसिल की जनवरी में हुई बैठक में उन्होंने विज्ञापनों की समय सीमा समाप्त होने की सूचना कुलपति को दी थी और मांग की थी कि जिन कॉलेजों व विभागों ने अपने यहां स्थायी नियुक्ति के लिए चयन समिति नहीं बैठी है। ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने उक्त पदों के लिए आवेदन किया था, आवेदन शुल्क लौटाया जाये।

उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन कॉलेजों द्वारा विज्ञापित पदों पर इंटरव्यू नहीं कराए है, कॉलेजों को उम्मीदवारों के आवेदन शुल्क के साथ आवेदन राशि ब्याज सहित लौटाई जाये क्योंकि जो राशि उम्मीदवारों से ली गई है उसका ब्याज विश्वविद्यालय व कॉलेजों ने लिया है इसलिए बेरोजगार युवाओं को उनकी राशि ब्याज सहित वापिस की जाये।

28 कॉलेजों में नहीं है गवर्निंग बॉडी

उन्होंने बताया है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले 28 कॉलेजों में मार्च 2019 से कोई गवर्निंग बॉडी नहीं है। उसके बावजूद टीचिंग और नॉन टीचिंग के पदों के विज्ञापन निकालने की कोशिश की जा रही है। बहुत से कॉलेजों में तो ट्रांकेटिड गवर्निंग बॉडी भी नहीं है बावजूद इसके गलत रोस्टर बनाकर पदों को विज्ञापित करने के लिए विश्वविद्यालय से अनुमति ली जा रही है।

प्रिंसिपल पदों की समय सीमा समाप्त

प्रो. सुमन ने यह भी बताया है कि श्री अरबिंदो कॉलेज, श्री अरबिंदो कॉलेज (सांध्य), सत्यवती कॉलेज, सत्यवती कॉलेज (सांध्य), राजधानी कॉलेज, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, भारती कॉलेज के अलावा बहुत से कॉलेजों ने प्राचार्य पदों के विज्ञापन निकाले थे उनकी भी समय सीमा समाप्त हो चुकी हैं मगर विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने प्राचार्यों के पदों के लिए भी शुद्धिपत्र (कोरिजेंडम) की मांग कुलपति से की है।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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