देश के ताजा हालात पर एक प्रश्न- क्या लिखूँ?
सत्ता की दलाली या अंतर्रात्मा की आवाज़ लिखूँ? झूठ का साम्राज्य या सच का ख्वाब लिखूँ? क्या लिखूँ? उन्नाव के किसानों का आर्द्र रूदन या बिचौलियों की सरकार लिखूँ? मजदूरों की कुदाल या पूँजीपतियों…
सत्ता की दलाली या अंतर्रात्मा की आवाज़ लिखूँ? झूठ का साम्राज्य या सच का ख्वाब लिखूँ? क्या लिखूँ? उन्नाव के किसानों का आर्द्र रूदन या बिचौलियों की सरकार लिखूँ? मजदूरों की कुदाल या पूँजीपतियों…
इंसान को इंसान से डर लगता है आखिर ना जाने क्यों उसे दुनिया जहां से डर लगता है चाहता तो है वो खुलकर ही करना बयां कड़वे सत्य को प्रत्येक अपनों से सदा पर…
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का महापर्व छठ के आते ही बाहर काम करने वाले बेटे, पति काम से छुट्टी ले ट्रेनों में बोरे की तरह कसकर आते हैं। विदेश रहने वाले परिवार के लोगों…
हालात, वक़्त, यादों का ढेर, दुःख, उदासी से पुते हुए पन्ने और वो। इक शाम आई और चली गई रात से डरकर। “मैं कौन हूँ” सोचते हुए अरसा बीत गया और जब जवाब आने को…