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हर युग में चीर हुआ औरत का

तस्वीर- गूगल आभार

हर युग में चीर हुआ औरत का,

कपड़ों की कमी न गाओ।

हैवान दरिंदों को तुम सब

मिलकर ऐसे न बढ़ाओ।

 

अपने-अपने बेटों को भी,

संस्कार शब्द सिखलाओ।

कब तक बेटी दोषी होगी,

बेटों के मन न बढ़ाओ।

 

रिश्ते नाते कोई भी हो,

इंसानियत को दिखलाओ।

तुम कृष्ण नहीं बन सकते तो,

इंसान का रूप बन जाओ।

 

कानून है अंधा बहरा भी,

तुम आशाओं को भुलाओ।

गर आसपास हो अत्याचार,

तुम खुद ही शस्त्र उठाओ।

 

सरकार सुनेगी नहीं कोई,

तुम हक की गुहार लगाओ।

कब तक चुप रह वंचित होंगे,

अब चुप्पी अपनी हटाओ।

हर युग में…

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

About the Author

साक्षी सांकृत्यायन
परास्नातक, प्राचीन इतिहास, प्रयागराज

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