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सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या के मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

किसान आंदोलन लगातार किसी न किसी विषय को लेकर खास चर्चा में बना रहता है। लेकिन आज सिंघु बॉर्डर पर जो हुआ उसे सुनकर दिल दहल जायेगा। 15 अक्टूबर यानी आज सुबह सिंघु बॉर्डर पर एक शव किसान आंदोलन के मंच के पास बैरिकेडिंग से लटका मिला। इस संबंध में मृत व्यक्ति की तमाम फोटो औऱ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। शव मिलने के बाद से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। शव को देखकर बताया जा रहा है कि उसकी बेरहमी से पिटाई की गई है और हाथ काटकर बैरिकेडिंग से लटका दिया गया। इस संबंध में किसान नेताओं से संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक करके बाकायदा प्रेस रिलीज भी जारी किया है। इसमें किसान नेताओं ने घटना के दोनों पक्षों मृतक और आरोपी से किसी तरह से किसान आंदोलन से संबंध होने से इनकार किया है।

सोनीपत के डीएसपी हंसराज ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “शुक्रवार की सुबह क़रीब पाँच बजे एक लटका हुआ शव बरामद हुआ. पैर कटे हुए थे। यह शव किसानों के प्रदर्शन स्थल सोनीपत के कुंडली में मिला है। इसके लिए ज़िम्मेदार कौन, इस बारे कुछ भी पता नहीं चल पाया है। अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है। वायरल वीडियो जाँच का विषय है। अफ़वाहों पर ध्यान ना दें।”

खबरों के मुताबिक इस घटना के संबंध में कुंडली थाने में आईपीसी की धारा 302 के तहत मुक़दमा भी दर्ज कर लिया गया है। मारे गए व्यक्ति की पहचान लखबीर सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब के तरनतारन ज़िले के रहने वाले थे।

मिली जानकारी के अनुसार, हत्या के पीछे की वजह यह है कि मृतक व्यक्ति लखबीर सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान किया था।

संयुक्त किसान मोर्चा ने क्या कहा

घटना के थोड़ी देर बाद संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई। इसके बाद किसान नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर किसान आंदोलन से इस घटना के संबंध होने से इनकार किया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी कर कहा है कि “मृतक व्यक्ति और निहंग समूह का का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं है। हम किसी भी धार्मिक ग्रंथ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ हैं, लेकिन इस आधार पर किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। हम यह मांग करते हैं कि इस हत्या और बेअदबी के षड़यंत्र के आरोप की जांच कर दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाए। संयुक्त किसान मोर्चा किसी भी कानून सम्मत कार्यवाही में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करेगा।”

संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने बयान में यह भी कहा है कि

संयुक्त किसान मोर्चा के संज्ञान में आया है कि आज सुबह सिंधु मोर्चा पर पंजाब के एक व्यक्ति (लखबीर सिंह, पुत्र दर्शन सिंह, गांव चीमा कला, थाना सराय अमानत खान, जिला तरनतारन) का अंग भंग कर उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना के लिए घटनास्थल के एक निहंग समूह/ग्रुप ने जिम्मेवारी ले ली है, और यह कहा है कि ऐसा उस व्यक्ति द्वारा सरबलोह ग्रंथ की बेअदबी करने की कोशिश के कारण किया गया। खबर है कि यह मृतक उसी समूह/ग्रुप के साथ पिछले कुछ समय से था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो

हत्या के पहले की तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इंसाफ की मांग कर रहे हैं। तमाम लोग किसान आंदोलन को लेकर तमाम सवाल भी उठा रहे हैं।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक वायरल वीडियो के मुताबिक

युवक की हत्या करने वाले निहंग कबूल करते हुए कह रहे हैं, ‘जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल, सिंघु बॉर्डर पर इस पापी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की। फौज ने इसका हाथ काट दिया और टांग भी काट दी है।’

एक निहंग बता रहा है कि जिस युवक को मारा गया है वह रात के समय निहंगों के तंबू में आया था। जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया गया था। युवक गुरु ग्रंथ साहिब को उठाकर भागने लगा तो सेवादारों ने उसे पकड़ लिया। युवक निहंग के बाने में था, लेकिन जब उसके कपड़े उतरवाए गए तो उसके सिर पर केश नहीं थे और उसने कछहरा पहना हुआ था। निहंगों ने उससे पूछताछ की। जब वह कुछ भी बताने को तैयार नहीं हुआ तो पहले उसकी बाजू और फिर टांग काट दी गई। इसके बाद उसकी मौत हो गई।

मौत से पहले के एक वीडियो में लखबीर खून से लथपथ तड़पता हुआ दिख रहा है। कुछ लोग उससे कह रहे हैं कि अपना नाम बताओ, कहां से आया और किसने यहां भेजा? वो कह रहा है कि सच्चे पातशाह गुरू तेग बहादुर निहंगों को मेरा वध करने की आज्ञा बख्शें और मुझे अपने चरणों में स्थान दें।

सोशल मीडिया पर लोग इस तरह निर्मम हत्या पर इंसाफ की मांग कर रहे हैं और कुछ लोग किसान आंदोलन पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्विटर पर लिखा है कि

योगेंद्र यादव के बगल में बैठकर अगर राकेश टिकैत ने लखीमपुर में मॉब लिंचिंग को सही नहीं ठहराया होता तो कुंडली सीमा पर एक युवक की हत्या नहीं हुई होती. किसानों के नाम पर इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे के अराजकतावादियों को बेनकाब करने की जरूरत है।

अल्का लांबा ने कहा कि किसानों को बदनाम करने और नए-नए षड्यंत्र रच आन्दोलन को खत्म करने की साज़िशें सत्ता में बैठी संघी सरकार लगातार रच रही है, अब तो लगने लगा है कि सरकार अपने लोगों को आंदोलन में शामिल करवा यह सब हिंसा करवा रही है, जिसने भी ऐसा किया है उसे कतई भी नहीं बख्शा जाना चाहिए।

राकेश टिकैत व अन्य किसान नेताओं ने क्या कहा

किसान नेता राकेश टिकैत ने भी एक बयान दिया है। आजतक से बात करते हुए टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही बयान जारी करके यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों पक्षों से हमारा कोई संबंध नहीं था। अब इसके आगे पुलिस और प्रशासन अपनी जांच कर रही है।

निहंग समूह द्वारा बनाए वायरल वीडियो के संबंध में उन्होंने कहा,

“हत्या हुई, नहीं होनी चाहिए थी. ग़लत हुआ। जिसको भी पता है की हत्या किसने की है, वो सरकारी गवाह बने और पुलिस को बता दे। ना हम थे वहां, ना आप थे! क़ानून इसकी जांच करेगा. प्रशासन लगा हुआ है।”

इस संबंध में योगेंद्र यादव सहित तमाम किसान नेताओं ने वीडियो जारी करते हुए बयान दिया है

“संयुक्त किसान मोर्चा इस नृशंस हत्या की कठोर निंदा करता है। हम किसी भी धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी के खिलाफ हैं,लेकिन इस आधार पर किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत बिलकुल भी नहीं है हत्या के दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाए।मोर्चा प्रशासन का हरसंभव सहयोग करेगा”

अखिल भारतीय किसान सभा महासचिव हन्नान मोल्लाह ने भी कहा कि 10 महीने से किसान आंदोलन को बदनाम करने का एक संयोजित प्रयास चल रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा से इसका कोई संबंध नहीं है। मोर्चा के बाहर एक ग्रुप वहां बैठा हुआ है, उन्होंने किया है। सरकार को जांच करनी चाहिए। पुलिस को जांच करनी चाहिए।

मृतक लखबीर सिंह के बारे में

मृतक की पहचान लखबीर सिंह के रूप में हुई है। लखबीर सिंह, पंजाब के ज़िला तरनतारन के चीमा कला गांव के रहने वाले थे। पुलिस ने पुष्टि की है कि लखबीर, अनुसूचित जाति से थे और किसी भी तरीक़े की अपराधिक या राजनीतिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक़ नहीं रखते थे। गांव में उनकी पत्नी और 3 बच्चे हैं।

उनके पिता का नाम दर्शन सिंह था।  6 महीने की उम्र में फूफा हरनाम सिंह ने लखबीर सिंह को गोद ले लिया था। लखबीर सिंह पेशे से मजदूर थे और उनकी उम्र 35-36 साल थी। उनके माता-पिता की मौत हो चुकी है। परिवार में अब सिर्फ एक विधवा बहन (राज कौर) है. उनकी पत्नी जसप्रीत कौर साथ में नहीं रहती थी। वह उनके तीन बच्चों को लेकर अलग रहती हैं।

हत्या के पीछे निहंग!

संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि इस हत्या के पीछे निहंग सिख हैं। उन्होंने ही उस शख्स का हाथ काटा और जान ली।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल का कहना है, इस घटना के पीछे निहंग हैं। उन्होंने इस बात को मान भी लिया है। निहंग सिख शुरुआत से हमारे लिए समस्या खड़ी कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि

मोर्चा ने कई मौकों पर दिल्ली और हरियाणा की पुलिस को निहंग सिखों को लेकर अलर्ट किया था। यह भी बता दिया गया था कि निहंग उनके मोर्चे का हिस्सा नहीं हैं। प्रेस रिलीज में मोर्चा ने कहा, ‘कई बार निहंगों से वह जगह खाली करने को कहा गया था। उनसे पवित्र ग्रंथ (जिसकी बेअदबी की कोशिश के आरोप मृतक पर लगे) को वहां प्रदर्शन वाली जगह से हटाने को भी कहा गया था।’

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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