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वीडियोः डीयू में 39 मंजिला इमारत को बनने से रोकने के लिए सड़कों पर क्यों आ रहे छात्र

दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली की तमाम तरह की अथॉरिटी- दिल्ली विकास प्राधिकरण(डीडीए), म्युनिसिपल कारपोरेशन दिल्ली (एमसीडी), दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) आदि के बीच लगभग एक दशक से चल रही घमासान समस्या का समाधान न होने के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने 4 नवंबर को धरना प्रदर्शन किया।

दरअसल विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के पीछे छात्र मार्ग पर 39-मंजिला की एक निजी बिल्डिंग बनाई जा रही है। जिसका मालिकाना हक़ यंग बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के हाथों में हैं, सन् 2001 में 3.5 एकड़ में फैली इस जमीन को भारत सरकार की डिफेन्स मिनिस्ट्री से दिल्ली मेट्रो ने स्टेशन बनाने तथा अन्य विकास कार्य के लिए 42.2 करोड़ में लिया था। मेट्रो का कार्य लगभग 1.5 एकड़ में ही समाप्त हो गया। 2008 में शेष बचे 2 एकड़ जमीन को 218 करोड़ में एक निजी बिल्डर (यंग बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड) को 90 साल के लिए लीज पर दे दिया गया। अब उस जमीन पर 39-मंजिले आवासीय बिल्डिंग बनाई जा रही है। जिसमें 410 आवासें होंगे।

दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय के दो कैंपस- नार्थ और साउथ को क्लोज कैंपस बनाने का प्रस्ताव है। हाल ही में विश्वविद्यालय एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग में वीसी ने क्लोज कैंपस बनाने के प्रस्ताव को पारित किया और एमसीडी की मदद से साल भर में इसे पूरा करने का दावा भी किया गया है। परन्तु इमारत के बन जाने से ही,दिव्यांग छात्रों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। प्रस्तावित ईमारत बनने वाली जगह से सटे हुए ही कुलपति आवास है तथा छात्र मार्ग पर ही 4 लड़किय़ों के छात्रावास हैं, जिसके निजता का सवाल महत्वपूर्ण है।

इसी सवालों के मद्देनज़र दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन न सिर्फ विरोध कर रहा है, बल्कि लगभग एक दशक से क़ानूनी लड़ाई भी लड़ रहा है। नार्थ कैंपस में इस तरह की बिल्डिंग बनना इसकी अस्मिता पर भी प्रहार होगा। क़ानूनी तौर पर 2015 में विश्वविद्यालय प्रशासन दिल्ली हाई कोर्ट में सिंगल-जज बेंच के सामने यह केस हार चुका है।

हाल में प्रशासन ने राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, जो विश्वविद्यालय का चांसलर भी है और प्रधानमंत्री को ख़त लिखकर मामले को संज्ञान में लेने का आग्रह किया है। अब देखना यह होगा, खुद को विश्वविद्यालय के एल्युमनी कहने वाले देश के प्रधानमंत्री इसकी अस्मिता को बचाने में किस तरह मददगार साबित होंगे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि “परिसर में एक बहु-मंजिला इमारत बनाने के प्रस्ताव में कई अंतर्निहित अनियमितताएं हैं जो विभिन्न एजेंसियों से अनुमति देने के संबंध में हैं। इसके अलावा, निर्माण में सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, परिवेश और दिल्ली विश्वविद्यालय के अद्वितीय चरित्र पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

“राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) को दिए गए एक आश्वासन में, निजी बिल्डर ने कहा है कि 227 पेड़ काटे जाएंगे और उनके स्थान पर 268 पेड़ लगाए जाएंगे। हालांकि, डीयू अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना यमुना नदी पर बनाई जा रही है।”

उत्तरी म्युनिसिपल कारपोरेशन दिल्ली (एमसीडी) के मेयर अवतार सिंह ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा है कि “मुझे एक पत्र के माध्यम से इस बिल्डिंग को बनाने के लिए दी गई स्वीकृति के बारे में बताया गया। मैंने जांच का आदेश दिया है और अधिकारियों से मामले को देखने को कहा है अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों की सुरक्षा को खतरे में न डाला जाए। यदि निर्माण शुरू हो गया है, तो हम इसे रोक देंगें।”

वहीं बिल्डिंग बनाने का कार्य तेज़ी से प्रगति पर है और अब जब प्रशासन का ध्यान धूमिल- सा नज़र आने लगा है तो विश्वविद्यालय के आम छात्रों ने ही इसकी जिम्मेदारी उठा ली हैं और कल यानी 4 नवम्बर से ” बिल्डिंग हटाओ, हॉस्टल बनाओ” नाम से एक शुरू करने जा रहे हैं। इस आन्दोलन को सफल बनाने के लिए “डीयू अगेंस्ट 39-फ्लोर प्राइवेट बिल्डिंग कमिटी” का गठन किया गया है। जिसमें छात्रों के संगठनों से भी शामिल होने का अनुरोध किया गया था तथा इसमें सभी कॉलेजों की यूनियन शामिल होकर आज से अपना अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पर बैठे है।

राजा चौधरी का कहना है की यह राफेल से बड़ा भ्रष्टाचार का मुद्दा है सरकार को इसपे एक जांच कमेटी बैठानी चहिये।

इस समिति के गठन का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में निजी भवन को बनने से रोकना तथा उस खाली जमीन पर छात्रावास बनाने का है। वहीँ कल से शुरू हो रहे आन्दोलन “बिल्डिंग हटाओ, हॉस्टल बनाओ” का प्राथमिक व तत्कालीन उद्देश्य- बनाई जा रही बिल्डिंग को रोकना है।

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