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बंगाल हिंसा पर सियासत कहीं राष्ट्रपति शासन लगने की आहट तो नहीं!

आप रो रहें हों और आपका प्रधानसेवक सियासत करने में मस्त हो, उसकी पार्टी पूरे देश में प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही हो तो अजीब तो लगेगा ही जैसा कि आप देख रहे हैं कोविड के दौर में लॉकडाउन की बात हो रही है मास्क लगाकर चलने और एहतियात बरतने की बात हो रही है। लेकिन प्रधानमंत्री का ध्यान अभी बंगाल चुनाव से हटा नहीं है। जहां लोग ऑक्सीजन की किल्लत के चलते दम तोड़ने का गम मना रहे हैं। और श्मशान में लम्बी लाइने लगा रहे हैं। तो वहीं हमारे प्रधानमंत्री 2 मई दीदी गई के नारे को न भुना पाने की वजह से बंगाल चुनाव की हार का गम मना रहे हैं।

उनका ध्यान जरा भी मरते लोगों की ओर नहीं है। यही कारण है हर दिन हाइकोर्ट इनकी सरकार को ऑक्सीजन के लिए फटकार लगा रही है और मोदी जी केवल बंगाल का समीकरण बिठाने में लगे हैं।  

लगता है सत्ता नहीं मिली तो अब चैन नहीं जब तक कि राष्ट्रपति शासन न लगे।

यही कारण है कि अब लोग मांग भी करने लगे कि राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाये बंगाल में। और ये लोग कौन है। ये हैं दीदी कंगना रनौत। इनके बारे में आपने सुना होगा कि 2 दिन से बंगाल चुनाव के बाद रो रही हैं और आज रोते रोते ऐसी बात कह दीं कि ट्विटर ने इनका परमानेंट ही एकाउंट सस्पेंड कर दिया। बताते हैं सिलसिलेवार कि क्या और क्यों हुआ ऐसा?  

ट्विटर पर कोई भी हिंसा या घृणा फैलाने जैसी बात करता है तो ट्विटर अपनी पोलिसी के अनुसार उसका अकाउंट सस्पेंड कर सकता है। कंगना के साथ भी यही हुआ। उनका ट्विटर एकाउंट इसलिए सस्रपेंड कर दिया गया क्योंकि कंगना लगातार बंगाल में हो रही हिंसा पर ट्वीट कर रही थीं। और 2002 में गुजरात में हुई हिंसा को दुबारा दोहराने की बात कर रही थी।

इस ख़बर के बीच ट्विटर पर #KanganaRanaut और #Suspended ट्रेंड कर रहा है.

एक ट्वीट में कंगना ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन की माँग करते हुए लिखा था, “गुंडई ख़त्म करने के लिए हमें सुपर गुंडई की ज़रूरत है. मोदी जी अपना ‘विराट रूप’ दिखाएँ, प्लीज़.”

 

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इसके अवाला भी उन्होंने अपने ट्वीट्स में कई ऐसी आपत्तिजनक और भड़काऊ बातें लिखी थीं. यही वजह है कि उनका ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया।

आपको मालूम है कि पश्चिम बंगाल विधानसभाचुनाव का 2 मई को रिजल्ट आया तो बीजेपी को बुरी तरह धक्का लगा। बंगाल में प्रचंड बहुमत के साथ टीएमसी पार्टी की जीत के बाद ममता दीदी की सरकार बनने की बारी आई तो वहां से हिंसा की खबरें आने लगीं। इसके बाद टीएमसी और बीजेपी दोनों तरफ से कार्यकर्ताओं के मारे जाने की बात सामने आई।

इसी को लेकर लेखक और बीजेपी नेता स्वपन दासगुप्ता ने एक ट्वीट किया,

”ननूर (जिला बीरभूम) में खतरनाक स्थिति पैद हो गई है जहां हिंसक भीड़ से बचने के लिए हजार से ज़्यादा हिंदू परिवार खेतों में भाग गए हैं. ये भीड़ बीजेपी के समर्थकों से बदला लेना चाहती है. महिलाओं के उत्पीड़न की भी खबरें आ रही हैं. अमित शाह कृपया इस इलाके में सुरक्षाकर्मियों को भेजिए.”

इसे ही री-ट्वीट करते हुए कंगना ने लिखा,

”ये भयानक है, इस गुंडई को खत्म करने के लिए हमें इससे भी बड़े लेवल पर गुंडई दिखाने की ज़रूरत है. वो (ममता) एक दानव की तरह हैं जिसे खुला छोड़ दिया गया है. मोदी जी, उन्हें काबू करने के लिए कृपया अपना 2000 के दशक की शुरुआत वाला विराट रूप दिखाइए.”

जिसके बाद कंगना ने रोते हुए वीडियो शेयर किया जिसमें वो कह रही हैं कि बंगाल से काफी खबरे आ रही हैं। लोगों के मर्डर हो रहे हैं। गैंग रेप हो रहे हैं। लेकिन कोई भी लिबरल इस पर कुछ नहीं बोल रहा। साथ ही कंगना मीडिया का नाम लेकर कहती हैं कि बीबीसी वर्ल्ड, टेलीग्राफ, टाइम, गार्डियन कोई इंटरनेशनल मीडिया इसको कवर नहीं कर रहा। कंगना आगे कहती हैं कि अब प्रेसिडेंट रूल की जरूरत है। नेहरू 12 बार प्रेसिडेंट रूल लगा चुके हैं इंदिरा गांधी ने 50 बार लगाया था। मनमोहन सिंह ने 10-12 बार लगाया था तो हम लोग किस से डर रहे हैं। इस देश को क्या देशद्रोही चलाएंगे। इस तरह की बातें कंगना अपने वीडियो में कर रही हैं।

इसके बाद पीएम मोदी अपना विराट रूप दिखाएं या न दिखायें लेकिन बंगाल हिंसा पर फोन पर राज्यपाल से बात की है और हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। अब देखना यह होगा कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगता है .या नहीं और कोरोना के दौर में और क्या क्या सियासतें चलती हैं।

लेकिन लोगों ने ट्विटर, फेसबुक पर इस बारे में लिखना शुरू कर दिया, ट्विटर ट्रेंड कराना भी शुरू कर दिया है।

कंगना के भडकाउ ट्वीट को लेकर ट्विटर द्वारा एकाउंट सस्पेंड कर देने के बाद कई लोगों ने ट्वीटर के इस कदम की काफी सराहना की है।  वहीं राष्टपति शासन को लेकर चिंता भी जताई है।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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