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गांधी से सभी राजनेता अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं- प्रो सुधीर चंद्रा

दिल्ली विश्वविद्यालय के जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय में गाँधी स्टडी सर्कल एवं इतिहास विभाग द्वारा महात्मा गाँधी की 150वी जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेमिनार, ‘दि डिस्टिंगविश स्पीकर सीरीज’ 4 अक्टूबर को दो सत्रों में आयोजित की गई। इसका विषय “गाँधी इन हिज टाइम्स एंड ऑउर्स” था। इस कार्यक्रम को देश भर से आये विभिन्न विश्वविद्यालय के  गाँधीवादी प्रोफेसर एवं चिंतको ने अपनी राय रखी। इनमे मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुधीर चंद्रा तथा अन्य पेनालिस्ट प्रो शाहिद अमीन, प्रो अलोक राय, डॉ निशिकांत कोलगे, डॉ रिंकू लाम्बा ने अपने गाँधीवादी शोध-मूल्यपरक विचारों से छात्राओं तथा प्राध्यापकों को सम्बोधित किया।

देखें वीडियो-

कार्यक्रम का आरम्भ सभी छात्राओं-प्राध्यापकों की उपस्थिति में मुख्य अतिथि तथा अन्य प्रोफेसर, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ स्वाति पाल, गाँधी स्टडी सर्कल प्रमुख डॉ सौम्या गुप्ता, इतिहास विभाग प्रमुख डॉ नताशा नोंगरी तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ मनीषा अग्निहोत्री की उपस्थिति में महाविद्यालय के 60 वर्ष पूरे होने के हीरक जयंती उपलक्ष्य पर पौधरोपण के साथ किया गया। इसके पश्चात् सभी महानुभावों का स्वागत पौधयुक्त गमला तथा शाल भेंट कर किया गया।

महाविद्यालय की गाँधी स्टडी सर्कल प्रमुख डॉ सौम्या गुप्ता ने कार्यक्रम का उद्देश्य एवं प्रस्तावना प्रस्तुत किया। इसके बाद इतिहास विभाग प्रमुख डॉ नताशा नोंगरी ने कार्यक्रम की विस्तृत रुपरेखा प्रस्तुत की। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ स्वाति पाल ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय 60 वर्ष पूरे होने पर हीरक जयंती मना रहा है और साथ-साथ यह भी कहा कि गाँधी एवं महाविद्यालय के संस्थापक भाईजी बृजकिशन चांदीवाला दोनों समकालिक तथा गाँधी जी के शिष्य भी थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन दोनों विभूतियों के बारे में शिक्षा की आवश्यकता है, जिसको जीवन में उतारकर अपने लक्ष्य को साधा जा सकता है।

मुख्य अतिथि प्रो सुधीर चंद्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि गाँधी एक व्यक्ति नही बल्कि एक महान विचार हैं जिसे चिंतन-मनन कर जीवन में धारण कर अपनाना चाहिए और उन्होंने यह भी कहा कि गाँधी की जरूरत सबसे ज्यादा आज है न कि पहले थी। उन्होंने गाँधी एवं महाविद्यालय के संस्थापक भाईजी बृजकिशन चांदीवाला के परस्पर संवाद को विस्तारपूर्वक बताया।

फोरम4 के एक सवाल के जवाब में प्रो सुधीर ने बताया कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने गांधी का अभी तक केवल इस्तेमाल किया है वह भी केवल अपना उल्लू सीधा करने के लिए। कांग्रेस ने जिस तरह से गांधी का इस्तेमाल किया वह एक अलग कहानी है औऱ अब बीजेपी और आरएसएस गांधी का गुणगान तब तक करेंगे जब तक वे अपने विचारों को जनता में फैलाने में कामयाब नहीं हो जाते। समय आने पर वे गांधी को पीछे छोड़कर चल देंगे।

उसके बाद प्रो आलोक राय ने गांधीजी के हिंदी, हिन्दूस्तान, हिन्दुस्तानी संस्कृति तथा हिन्दुस्तानी भाषाओं पर अधिक जोर दिया, कि भाषाओं के माध्यम से सांप्रदायिक सद्भावना को स्थापित किया जा सकता है। प्रो शाहिद अमीन ने गांधीजी के 1917 के चंपारण आन्दोलन और किसानों के पारस्परिक अधिकारों एवं हितों का विस्तार से उल्लेख किया।

इस अवसर पर डॉ निशिकांत कोलगे ने गाँधी के सैद्धांतिक एवं व्यावाहारिक नैतिकता को विस्तारपूर्वक उल्लेख किया औऱ कहा कि गाँधी केवल नैतिक सिद्धांत ही नहीं बल्कि राजनीतिक नेता भी थे जिससे राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक मूल्यों को साधा जा सके। अंतिम वक्ता के रूप में डॉ रिंकू लाम्बा ने गांधीजी तथा उनके धार्मिक विचारों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ मनीषा अग्निहोत्री द्वारा धन्यवाद भाषण देकर कार्यक्रम का समापन किया गया।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

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