सहायता करे
SUBSCRIBE
FOLLOW US
  • YouTube
Loading
  • 203
    Shares

किसानों के आगे झुकने लगी है सरकार, पराली जलाने पर अब नहीं होगा जुर्माना!

किसान आंदोलन को एक महीने से भी ज्यादा हो चुके हैं यानी पूरे 36 दिन हो चुके हैं। अभी भी सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने को तैयार नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से किसानों की 4 मांगों में से 2 बातों पर सरकार की तरफ से आश्वासन जरूर मिला है। पहला ये कि पराली जलाने पर केस दर्ज नहीं किया जाएगा औऱ दूसरा बिजली अधिनियम में संशोधन नहीं होगा। सरकार ने पराली जलाने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना और 5 साल की कैद का प्रावधान बनाया था, जिसके बाद कई किसानों को पराली जलाने पर जेल में भी डाला जा सकता था। लेकिन अब सरकार की ओर से कहा गया है कि वह इस प्रावधान को हटा देगी। वहीं, बिजली अधिनियम में संशोधन नहीं किया जाएगा। किसानों को आशंका है कि इस कानून से बिजली सब्सिडी बंद होगी इसलिए अब यह कानून नहीं बनेगा। इन सबके इतर अभी भी दो बातें जो सबसे महत्वपूर्ण हैं उन पर आमसहमति बनते नहीं दिखी। ये दो मांग तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी(MSP) पर अलग कानून बनाने की थी। इन सब पर अब किसान नेताओं की चर्चा 4 जनवरी की होने वाली बैठक में होने वाली है। अब तक कुल 7 बैठकें हो चुकी हैं। अगर सरकार 4 जनवरी की बैठक में सरकार कृषि कानून वापस ले लेती है तो ये आंदोलन अपने आप में सफल माना जाएगा। हालांकि अभी भी किसानों को संदेह है कि सरकार अभी भी कृषि कानूनों को वापिस नहीं लेना चाहती इसलिए आज भी दिल्ली के चारों ओर सटे राज्यों की सीमाओं पर ठिठुरती ठंड में भी अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

नया साल बॉर्डर पर मनायेंगे किसान

नए साल पर देश के सभी लोगों से अपील की गई है कि दिल्ली के हर मोर्चे पर जहां भी आंदोलन हो रहा है, वहां वे आएं। बीते दिनों में कुछ खास हुआ है तो ये कि केंद्र मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसानों का बना लंगर खाया। इसके अलावा इस आंदोलन में ओर कुछ नहीं बदला। किसान दिल्ली की सीमाओं पर ट्रेक्टर ही ट्रेक्टर दिखाई देते हैं हालांकि पहले ये सिर्फ 2-3 किलोमीटर तक था पर अब ये सिंधु बॉर्डर पर 5-6 किलोमीटर तक किसानों का जत्था मिलेगा। आज साल का आखिरी दिन भी है और किसानों ने लोगों को सिंधु बॉर्डर पर नया साल मनाने के लिए आमंत्रित भी किया। किसान तो अपने घर नहीं जा रहे, ऐसे में किसानों ने सभी लोगों से अपील है कि वे यहां आएं।

किसानों के हौसले बुलंद हैं

सर्दी ज्यादा है पर हिम्मत और हौसला किसानों में बुलंद है। सिंधु बॉर्डर पर हजारों की संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसान बैठे हैं। खाने का, रहने का और सोने का पूरा इंतजाम बॉर्डर पर है और सिर्फ सिंधु बॉर्डर पर ही नहीं बल्कि टिकरी बॉर्डर और गाजिपुर बॉर्डर पर भी ऐसे ही इंतजाम देखने को मिलेंगे। कुछ ऐसी चीजें और नये प्रयोग भी देखने को मिलेंगे जो शायद आपने पहले कभी न देखें हो।

30 दिसंबर को जब केंद्रीय मंत्री और किसानों की वार्ता हुई तो लंच ब्रेक में किसानों के साथ ही खाना खाया। हो सकता है सरकार सिर्फ सहानुभूति दिखाने, बहलाने और फुसलाने का प्रयास कर रही हो क्योंकि कृषि कानून सरकार वापस ले नहीं रही दूसरी तरफ सरकार के ही मंत्री किसानों को खालिस्तानी, पाकिस्तानी और शाहीन बाग का बता रहे हैं।

रोज एक किसान की हो रही है मौत

सर्दी भी लगातार बढ़ ही जी रही है। कड़कड़ाके की ठंड में सड़कों पर सोना कोई आसान काम नहीं है। जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है तब से ही रोज किसी न किसी किसान की मौत हो रही है। अब तक 40 किसानों की मौत हो चुकी है। वे भी अपना घर परिवार सब कुछ छोड़कर सड़क पर इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि सरकार इन कानूनों को वापस ले लें और वो अपने घर वापस चले जाएंगे।

किसानों ने सड़कों पर उगा डाली प्याज

इस आंदोलन में एक खास बात ये लगी कि किसानों ने बिल्कुल भी हार नहीं मानी उदास बिल्कुल नहीं हुए बल्कि बुराड़ी के निरंकारी मैदान में किसानों ने प्याज उगा डाली। सिंधु बॉर्डर पर किसान मॉल खुल चुका है, जिम की पूरी व्यव्स्था है, मुफ्त में गिजर बांटे जा रहे हैं। जितनी भी व्यवस्था वहां कि गई है वो बिल्कुल मुफ्त में की जा रही है। किसान मॉल से कोई भी समान जरूरत का आकर ले सकता है, वो भी मुफ्त में उसके लिए उन्हें कोई पैसे देने की जरूरत नहीं। कुछ भी कहिए किसानों को पर ये आंदोलन हमेशा हमेशा के लिए याद रखा जाएगा।

Disclaimer: इस लेख में अभिव्यक्ति विचार लेखक के अनुभव, शोध और चिन्तन पर आधारित हैं। किसी भी विवाद के लिए फोरम4 उत्तरदायी नहीं होगा।

About the Author

कोमल कश्यप
कोमल स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।

Be the first to comment on "किसानों के आगे झुकने लगी है सरकार, पराली जलाने पर अब नहीं होगा जुर्माना!"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*