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Articles by विकास पोरवाल

जीवन में जूझते हुए ईश्वर के पद तक पहुंचते हैं वाल्मीकि के राम

तमसा नदी के तट पर पीपल के वृक्ष के नीचे एक ऋषि विचारमग्न थे। सुबह की वेला में नदी की लहरें शांत थीं। मंद हवा बह रही थी, जिनमें पत्तियां-डालियां हिल-मिल रही थीं। पंछी घोसलों…


जयंती विशेष : जय का प्रकाश फैलाते रहे लोकनायक

साल था 1914। पटना के एक मैदान में काफी भीड़ जमा थी। सबसे अधिक संख्या नौजवानों और कॉलेज में पढ़ने वाले लड़कों की थी। जलियांवाला बाग हत्याकांड से देश झुब्ध था। हर तरफ गम और…


नियंत्रण करने की प्रवृत्ति को नियंत्रित करने का पर्व है विजयादशमी

विजयादशमी, शक्ति का उत्सव। शक्ति भी कैसी, वह जो अन्याय का विरोध करे, जो कमजोर को सहारा दे। वह क्रूर न हो, बल्कि करुणा का सागर बने। पुरुषार्थ को आधार बनाकर मानवता का कल्याण करे…


‘राम की शक्ति पूजा’ कविता में है जीवन का आधार

शक्ति की अधिष्ठात्री देवी का पर्व जारी है और इस कड़ी में सोमवार को नवां दिन था। सनातन परंपरा का यह पर्व कई पीढ़ियों, सदियों और शायद युगों से चला आ रहा है। दरअसल शक्ति…